सोमवार को गलवान घाटी में 20 भारतीय जवानों के शहीद

सोमवार को गलवान घाटी में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद बीजेपी नेता जमैयांग त्सेरिंग नामग्याल ने कहा कि लद्दाख सेना के साथ एकजुटता से खड़ा था। उन्‍होंने कहा कि 1962 की लड़ाई के बाद से अक्साई चिन क्षेत्र को वापस लेने के लिए चीन को कड़ा संदेश देने का समय आ गया है।

नामग्‍याल ने कहा, ‘जहां कर्नल सहित 20 सेना के जवान चीनी सैनिकों के साथ झड़प में शहीद हुए, उसका लद्दाख के लोग एकमुश्त समाधान” चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना के बाद प्रतिक्रिया देते हुए उन शब्दों का ही प्रयोग किया, जोकि 2016 के उरी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तानी आतंकवादी लॉन्च पैड के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक में किए गए थे।’ उन्‍होंने कहा, “लद्दाख के लोग सेना और देश के साथ खड़े हैं। सरकार जो भी निर्णय लेती है, हम उसके साथ खड़े होंगे। हम एकमुश्त समाधान चाहते हैं। लद्दाख के लोग ही नहीं बल्कि देश के लोग भी एकमुश्त समाधान चाहते हैं।”

बीजेपी सांसद ने कहा, “हम नहीं चाहते हैं कि हमारे देश के सैनिक बार-बार जान गंवाएं। हम सीमा के साथ रह रहे नागरिकों के जीवन में कोई गड़बड़ी नहीं चाहते हैं। इसीलिए हम एकमुश्त समाधान, विवाद का अंत चाहते हैं।” 1962 के बाद से चीन ने भारत को एक या दो बार नहीं बल्कि सौ बार धोखा दिया है। 1962 की लड़ाई में उन्होंने हमसे 37,244 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र लिया, जिसे आज हम अक्साई चीन के नाम से जानते हैं। मुझे अक्सिन चिन शब्द सुनने में भी अजीब लगता है। वह अक्साई चिन नहीं है, यह चीन के कब्जे वाला भारतीय क्षेत्र है। ”

नामग्याल ने कहा, “यह चीन के कब्जे वाला लद्दाख है। इस पर हमारा दावा हमेशा बना रहना चाहिए। कई लोग सवाल करते हैं कि क्या इसे वापस लेना संभव है। मैं इसे आसान नहीं मानता, लेकिन मैं इसे असंभव भी नहीं मानता। मुझे लगता है कि हमारे सैनिकों के बलिदान के बाद अक्साई चिन को वापस लेने का समय आ गया है।”

नामग्याल ने चीन की हिंसा पर कड़ी चेतावनी दी है। उन्‍होंने कहा, “आज सरकार 1962  वाली नहीं है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जो कहते हैं, वह करते हैं। सर्जिकल स्ट्राइक से पहले उन्होंने कहा था कि हमारे सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने एक बार फिर उसी लाइन को दोहराया। मुझे विश्वास दिलाता है कि सरकार सक्षम है।

बता दें कि चीनी बलों के साथ मुठभेड़ के बाद बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि वह राष्ट्र को आश्वस्त करना चाहते हैं कि लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष में शहीद हुए भारतीय सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और भारतशांति की बात करता है, लेकिन अगर हमें उकसाया गया तो उचित जवाब देने में सक्षम है।

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