सोमवार को हुई चीनी सेना के भिड़ंत के बाद भारत ने ड्रैगन को करारा जवाब दिया

सोमवार को हुई चीनी सेना के भिड़ंत के बाद भारत ने ड्रैगन को करारा जवाब दिया है। सेना के इंजीनियरों ने पूर्वी लद्दाख में गलवान नदी पर एक 60 मीटर का पुल का काम पूरा कर लिया है। इस पुल की मदद से भारतीय पैदल सेना संवेदनशील क्षेत्र में भारत की पकड़ को मजबूत करेगा और दरबुक से दौलत गर्ग ओल्डी तक 255 किलोमीटर की रणनीतिक सड़क की रक्षा करेगा। भारत की काराकोरम दर्रे के ठीक दक्षिण में अंतिम सैन्य चौकी है।

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हिंदुस्तान टाइम्स ने शीर्ष अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि पीएलए इस परियोजना का काम रोकने पर अड़ा था, इसके बावजूद भारतीय सेना इस पुल का निर्माण सेना के इंजीनियरों द्वारा किया गया। पीएलए के पश्चिमी कमान ने पूरी गलवन नदी घाटी पर अपना दावा करने से पहले पुल के निर्माण को रोकने के लिए में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी पूर्वी लद्दाख में आक्रामक रुख अपना रही थी, जिसके कारण दो काउंट्री के बीच गतिरोध पैदा हो गया था।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि पुल गुरुवार को पूरा हो गया था। सेना ने चीन को साफ संकेत दे दिया है कि बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और सीमा सड़क संगठन का काम पीएलए द्वारा रोकने के बावजूद जारी रहेगा।

चार-स्पैन पुल श्योक नदी-गाल्वन नदी के संगम से तीन किलोमीटर पूर्व में स्थित है और बेली ब्रिज से 2 किमी पूर्व में स्थित पैट्रोलिंग पॉइंट 14 से जुड़ा है। पैट्रोलिंग पॉइंट 14 पर ही 15 जून को दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। यह वाई-जंक्शन के करीब है, जहां गलवान की छोटी नदी मुख्य नदी में मिलती है। यहां पर एक भारतीय सेना का बेस कैंप, जिसे ‘120 किमी का कैंप’ कहा जाता है, दो नदियों के संगम पर और DSDBO रोड के बगल में है।

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, “हमने तनाव के बाद भी इस पुल पर काम नहीं रोका और 15 जून को हिंसक सामना करने के बावजूद काम करते रहे।” पूरी गलवान नदी घाटी को अपने कब्जे में करने का चीनी दावा श्योक नदी के लिए भारतीय दावे को कम करने का एक प्रयास है। यदि ऐसा होता है तो चीनी युद्ध के समय में DSDBO सड़क से आगे निकल सकते हैं और डॉल्ट बेग ओल्डी के लिए सड़क काट सकते हैं। यह उन्हें डीबीओ से पहले अंतिम भारतीय गांव मुर्गो के माध्यम से पाकिस्तान के लिए एक और सड़क खोलने की अनुमति देगा।

कंक्रीट के खंभों पर बना बेली पुल भारत को पहुंच और सैन्य जुटाव के मामले में एक बड़ा फायदा देता है। इसे भारतीय सामरिक हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। भारतीय सेना वाहनों के साथ अब गलवन नदी को पार करने में सक्षम है। इस पुल के बनने के बाद सैनिकों के पास अब सबसे खराब स्थिति के मामले में आक्रामक PLA के खिलाफ अन्य सैन्य विकल्प उपलब्ध हैं। यह पुल गलवान नदी पर बने फुटब्रिज की जगह बनाया गया है।

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