जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई है

वैश्विक वैकल्पिक परिसंपत्ति कंपनी (ग्लोबल अल्टरनेटिव एसेट फर्म) टीपीजी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स में 0.93 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 4,546.80 करोड़ रुपए का निवेश किया है। यह पिछले आठ सप्ताह में जियो में नौवां निवेश है। इसके साथ ही 49 दिनों के भीतर जियो में सम्मिलित निवेश एक लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है।

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रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शनिवार (13 जून) को एक बयान में कहा कि टीपीजी ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 0.93 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले यह निवेश किया है। उसने कहा कि इस सौदे में जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर मूल्यांकन 4.91 लाख करोड़ रुपए और उपक्रम मूल्यांकन 5.16 लाख करोड़ रुपए किया गया।

जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश का जो सिलसिला शुरू हुआ था वह थमने का नाम नहीं रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज अब तक कुल मिलाकर जियो प्लेटफॉर्म्स की 21.99 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के सौदे कर चुकी है, जिससे कुल मिलाकर कंपनी को 102,432.45 करोड़ रुपए मिले हैं। यह निवेश 22 अप्रैल को फेसबुक से शुरू हुआ था, उसके बाद सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी, जनरल अटलांटिक, केकेआर, मुबाडला और सिल्वर लेक ने अतिरिक्त निवेश किया था। पिछले रविवार (7 जून) को ही अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (एडीआईए) ने भी निवेश की घोषणा की थी।

इस निवेश के मौके पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा, “आज एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में टीजीपी का स्वागत करते हुए मुझे खुशी हो रही है। जो एक डिजिटल इकोसिस्टम के माध्यम से भारतीयों के जीवन को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के हमारे निरंतर प्रयासों के हमसफर होंगे। हम टीपीजी के वैश्विक प्रौद्योगिकी व्यवसायों में निवेश के ट्रैक रिकॉर्ड से प्रभावित हैं, जो सैकड़ों करोड़ उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के साथ काम करते हैं और बेहतर समाज बना रहे हैं।” वहीं, टीपीजी के को-सीईओ जिम-कोल्टर ने कहा, “हम जियो में निवेश के लिए रिलायंस के साथ भागीदारी करके उत्साहित महसूस कर रहें हैं क्योंकि जियो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को बदल रहा है।”

जियो प्लेटफॉर्म्स

जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई है। अगली पीढ़ी की टेक्नॉलोजी कंपनी देश को एक डिजिटल समाज के रुप में विकसित बनाने के लक्ष्य से जुटी हुई है। इसके लिए जियो के प्रमुख डिजिटल एप, डिजिटल ईकोसिस्टम और देश के नंबर एक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी प्लेटफ़ॉर्म को एक-साथ लाने का काम कर रही है।

रिलायंस जियो इंफ़ोकॉम लिमिटेड, जिसके 38 करोड़ 80 लाख ग्राहक हैं, जियो प्लेटफ़ॉर्म्स लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई बनी रहेगी। जियो एक ऐसे ‘डिजिटल भारत’ का निर्माण करना चाहता है जिसका फ़ायदा 130 करोड़ भारतीयों और व्यवसायों को मिले। एक ऐसा ‘डिजिटल भारत’ जिससे ख़ास तौर पर देश के छोटे व्यापारियों, माइक्रो व्यवसायियों और किसानों के हाथ मज़बूत हों। जियो ने भारत में डिजिटल क्रांति लाने और भारत को दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल ताकतों के बीच अहम स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

टीजीपी के बारे में

टीजीपी एक प्रमुख वैश्विक एसेट फर्म है, जिसकी स्थापना 1992 में 79 बिलियन डॉलर से अधिक परिसंपत्तियों के प्रबंधन के साथ हुई थी। जिसमें निजी इक्विटी, ग्रोथ इक्विटी, रियल एस्टेट और पब्लिक इक्विटी शामिल हैं। टीपीजी ने 25 वर्षों से अधिक के इतिहास में दुनिया भर में सैकड़ों पोर्टफोलियो कंपनियों का एक विस्तृत नेटवर्क बनाया है। वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों में इसके निवेश में एयरबीएनबी, उबेर और स्पॉटिफ़ाई शामिल हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज को कर्जमुक्त बनाने लक्ष्य

भारत के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी (63) ने अपनी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को मार्च 2021 से पहले कर्जमुक्त बनाने का पिछले साल अगस्त में लक्ष्य तय किया था। जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश के इन सौदों तथा 53,125 करोड़ रुपए के राइट इश्यू के कारण अंबानी का लक्ष्य समय से काफी पहले ही पूरा होता दिख रहा है।

ऐसा अनुमान है कि इस साल दिसंबर तक रिलायंस इंडस्ट्रीज कर्जमुक्त हो जाएगी। मार्च तिमाही के अंत तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के ऊपर 3,36,294 करोड़ रुपए के बकाए थे, जबकि उसके पास 1,75,259 करोड़ रुपये की नकदी मौजूद थी। इस तरह कंपनी का शुद्ध उधार 1,61,035 करोड़ रुपए हुआ। कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश के इन सौदों तथा हालिया राइट इश्यू से करीब 1.50 लाख करोड़ रुपए जुटा चुकी है।

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