स्वस्तिक चिन्ह बनाते समय जरूर ध्यान रखें ये बातें!

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दोस्तों आपको बता दे की प्राचीन काल से स्वास्तिक हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है और इसे मंलग प्रतीक भी माना जाता है। स्वस्तिक चिह्न को बेहद ही पवित्र माना जाता है और इसे भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। दोस्तों किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले स्वास्तिक चिन्ह जरूर बनाया जाता है और इसका पूजन भी किया जाता है। स्वस्तिक चिह्न को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है और इसे बनाने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है। दोस्तों केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि इसका महत्व वास्तु में भी है। दोस्तों आप सभीको पता हैं किसी भी पूजा को शुरू करने से पहले स्वस्तिक चिह्न को जरूर बनाया जाता है। लेकिन स्वस्तिक चिह्न बनाते समय इन बातों का जरूरध्यान रखें।

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दोस्तों आप कभी भी उल्टा स्वस्तिक पूजा करते समय ना बनाएं। पूजा या कोई भी शुभ कार्य करते समय उल्टा स्वस्तिक बनाना शुभ नहीं माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार आपको बता दे की स्वस्तिक चिन्ह को आप केवल हल्दी और तिलक (लाल सिंदूर) से ही बनाएं और भूलकर भी काले रंग से स्वस्तिक ना बनाएं।

शास्त्रों के अनुसार घर में बुरी नजर लगने पर आप गोबर का स्वस्तिक बनाएं। शास्त्रों मे ऐसा माना जाता है कि गोबर का स्वस्तिक बनाने से बुरी नजर उतर जाती है और घर पर किसी की भी बुरी नजर नहीं लगती है।

दोस्तों आपको बता दे की आप जिस जगह पर इस चिन्ह को बनाएं उस जगह को पहले अच्छे से साफ कर लें और फिर ही इस चिन्ह को बनाएं। शास्त्रों मे अनुसार पूजा करते समय आप चावल की मदद से भी स्वस्तिक बना सकते हैं और इसके ऊपर सुपारी भी रख सकते हैं।

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दोस्तोंजिन लोगों के जीवन में शादी से जुड़ी समस्याएं चल रही है वो लोग अपने पूजा घर में हल्दी का स्वस्तिक बना लें। शास्त्रों के अनुसार गृह प्रवेश के दौरान आप घर के मुख्य दरवाजे पर हल्दी की मदद से स्वस्तिक बना सकते हैं। दोस्तों जबकि हवन के दौरान कुमकुम का स्वस्तिक बनाना शुभ माना जाता है।

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