Corona Vaccine की मिक्स डोज सही या गलत, जान लें क्या कहती है रिसर्च

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वैश्विक महामारी के दौरान सही समय पर सभी लोगों को सही टीके प्राप्त करना, एक तार्किक चुनौती साबित हो रहा है। व्यक्ति को व्यापक रूप से उपलब्ध सभी कोविड -19 टीकों के दो खुराक की आवश्यकता होती है। पहली खुराक प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करती है और दूसरी खुराक (आमतौर पर पहली खुराक के कुछ सप्ताह बाद दी जाती है) इसे बढ़ा देती है। टीकों की खुराक को मिलाने की संभावना वैक्सीन रोलआउट को बढ़ाने का मौका देती है और संभावित रूप से प्रदान की गई प्रतिरक्षा को बढ़ावा देती है।

लेकिन ऐसे में ये सवाल भी उठ रहे हैं कि वैक्सीन की पर्याप्त मात्रा ना होने के कारण क्या किसी व्यक्ति को कोविड वैक्सीन की मिक्सड डोज लगाई जा सकती है। उदाहरण के तौर पर किसी को कोविशील्ड लगी हो तो क्या दूसरी डोज कोवैक्सीन की दी जा सकती है? या इसके उलट पहली डोज कोवैक्सीन की तो दूसरी कोविशील्ड दे सकते हैं? अगर ऐसा हो गया तो क्या होगा? इसी बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

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वाकई में अभी इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है और देश इस बात से डरते हैं कि कहीं वैक्सीन की दोनों डोज अलग अलग हो तो कहीं वैक्सीनेशन पर पानी तो नहीं फिर जाएगा। इसलिए भारत सरकार ने ये सुनिश्चित किया है कि किसी को अगर कोरोना वैक्सीन के तौर पर कोविशील्ड लगी है तो उसे दूसरी डोज भी कोविशील्ड ही लगनी चाहिए।

वीके पॉल ने कहा ये

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल पहली बार में तो मिक्स डोज के लिए मना कर चुके हैं लेकिन साथ में यह भी कहते हैं कि अगर किसी को मिक्स डोज लग जाए तो ‘एडवर्स इफेक्ट’ यानी कि साइड इफेक्ट होने की आशंका कम है। उनके अनुसार किसी व्यक्ति को दूसरी डोज कोई और वैक्सीन दी जाए तो इम्युनिटी और ज्यादा उभर कर सामने आती है।

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रिसर्च है जारी

इस पर दुनिया भर में पिछले चार महीने से अलग-अलग अध्ययन किए जा रहे हैं। ब्रिटेन में तो फरवरी में इसके लिए ट्रायल शुरू किया और उसी के आधार पर एक व्यक्ति को पहले फाइजर और दूसरी बार एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लगाई गई। ब्रिटेन में आठ अलग अलग वैक्सीन का कॉकटेल बना कर लोगों को दिया जा रहा है। चीन ने भी पहले ऐसा ही किया था लेकिन इसके कोई दुष्परिणाम सामने नहीं आए।

हाल ही में स्पेन और ब्रिटेन में वैक्सीन को मिला जुलाकर लेने से आंकड़े जारी किए। इनके अनुसार मिक्स एंड मैच शेड्यूल एक ही टीके की दो खुराक की तुलना में उच्च एंटीबॉडी स्तर दे सकता है। यानी ये अब तक अच्छा ही साबित हुआ है।

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तो क्या लगवा सकते हैं मिक्स डोज

मई में ‘लैंसेट’ में छपी यूके मिक्स एंड मैच स्टडी में, 50 वर्ष से अधिक उम्र के 830 वयस्कों को पहले फाइजर या एस्ट्राजेनेका के टीके लगाने के लिए चुना गया। वैक्सीन लगवाने के बाद उन्हें थकान, सिरदर्द, बुखार, जोड़ों में दर्द, अस्वस्थता, मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्या दिखी जो समान वैक्सीन लेने वालों को भी होती है। अभी मिक्स डोज की विधि रिसर्च फेज में है। इसके प्रभावी होने का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन संभावना है कि इसके परिणाम अच्छे ही होंगे।


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