जानें, क्यों आयुर्वेद में होली पर ठंडाई पीने की दी जाती है सलाह

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सनातन धर्म में होली पर्व का विशेष महत्व है। दैविक काल से होली मनाई जाती है। हिंदी पंचांग अनुसार फाल्गुन माह में पूर्णिमा के दिन होलिका दहन होता है। इसके अगले दिन होली मनाई जाती है। यह दिन चैत माह में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को पड़ता है। होली रंग और गुलाल का त्यौहार है। इसे मस्ती का त्यौहार भी कहा जाता है। इसके लिए होली के मौके पर पकवान समेत भांग और ठंडाई का सेवन किया जाता है। सदियों से होली पर भांग के लड्डू खाए जाते हैं। वहीं, ठंडाई का भी सेवन किया जाता है। खासकर राजस्थान में इसकी खपत अधिक है। हालांकि, सेहत के लिए ठंडाई किसी दवा से कम नहीं होती है। इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए लाभदायक होते हैं। अगर आप ठंडाई के फायदे से वाकिफ नहीं है, तो आइए जानते हैं-

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दूध

दूध कैल्शियम और प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत होता है। इसके आलावा, दूध में ज़िंक, फॉस्फोरस और आयरन होता है। ठंडे दूध को अम्लत्वनाशक या खट्टेपन को कम करने वाला पेय माना जाता है।

सौंफ

सौंफ़ के बीजों में एंटीऑक्सीडेंट के गुण पाए जाते हैं, जिन्हें फाइटोकेमिकल्स कहा जाता है। फाइटोकेमिकल्स सेहत के लिए बहुत लाभकारी होता है। खासकर पेट संबंधी विकारों को दूर करने में रामबाण दवा है। इसके लिए खाना खाने के बाद सौंफ खाने का चलन है।

कद्दू के बीज

इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। साथ ही दिल को स्वस्थ रखने वाले तत्व मैग्नीशियम पाया जाता है। इसके लिए कद्दू के बीज को ठंडाई में डाला जाता है।

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केसर

इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी डिप्रेसेंट यानी अवसादरोधी, एंटीसेप्टिक और ऐंटी-कन्वल्सन्ट के गुण पाए जाते हैं। इसके लिए केसर का इस्तेमाल ठंडाई में किया जाता है। इसके सेवन से अवसाद में आराम मिलता है।

गुलाब की पंखुड़ियां

गुलाब सेहत और सुंदरता दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा गुलाब की पंखुड़ियों के सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है। साथ ही पेट संबंधी विकार दूर हो जाते हैं।

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